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ग्राम संसदGram Sansadरैंडम वेरिएबल फ़ाउंडेशन की एक पहल

ग्राम संसद

सशक्त पंचायतसमर्थ पंचायतबेहतर पंचायत

मज़बूत गाँव से बनता है मज़बूत भारत

ग्राम संसद एक ऐसा मंच है जहाँ ग्राम पंचायतें, सरकार और सहयोगी संस्थाएँ मिलकर स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) के 9 विषयों के लिए प्रमाण-आधारित योजनाएँ बनाती हैं, और आगे बढ़ने वाले गाँवों को सम्मानित करती हैं।

वर्षों का कार्य
6+
वर्षों का कार्य
राज्य
7
राज्य
ग्राम पंचायतें
2,972
ग्राम पंचायतें
ग्राम पंचायत कार्यालय के बाहर बैठक करते पंचायत सदस्य और ग्रामीण
ग्राम संसद राजस्थान सरपंच संवाद, जयपुर में दीप प्रज्वलन
अपने घर के बाहर एक ग्रामीण परिवार

हमारे कार्यक्रम सहयोगी

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार
  • पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार
  • ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार
  • पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार
  • पंचायती राज विभाग, उत्तराखंड सरकार
  • ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग, कर्नाटक सरकार
  • G20 भारत 2023
  • इंडियन ऑयल
  • भारत पेट्रोलियम

7

राज्य

2,972

ग्राम पंचायतें

427

आदर्श पंचायतें

2,453

मुखिया और सरपंच

भारत भर के ग्रामीण परिवार और पंचायत सदस्य
ग्राम संसद में आपका स्वागत है

गाँव के सशक्तिकरण का समुदाय-आधारित मॉडल

ग्राम संसद स्थानीय ज्ञान को विशेषज्ञता से जोड़ता है। हम पंचायतों, सरकारी विभागों, उद्योग और नागरिकों को साथ लाकर समस्याओं की पहचान करते हैं, प्रमाण-आधारित योजनाएँ बनाते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं।

दृष्टि

ग्रामीण तालमेल और उत्थान के लिए सभी हितधारकों के बीच मज़बूत और टिकाऊ संबंध बनाना। दूसरी जगहों पर सफल रहे कामों के ज्ञान और अनुभव के आधार पर, हर क्षेत्र के लिए अलग कारोबारी रोडमैप और नीति दिशानिर्देश तैयार करना, ताकि ग्रामीण तालमेल बेहतर हो।

मिशन

ज्ञान साझा करने और लोगों को जोड़ने वाला ऐसा माध्यम बनना जो ग्रामीण समुदायों की तस्वीर बदल दे। सरकार और ग्रामीण उद्योगों के सामने आने वाली नीतिगत चुनौतियों के समाधान के लिए बौद्धिक मार्गदर्शन, मिल-जुलकर रणनीतिक सोच और नए विचार देना।

उद्देश्य

आज बिखरे हुए ज्ञान के बेहतर आदान-प्रदान, सामाजिक नवाचार को बढ़ावा, मज़बूत आर्थिक सहयोग और एकीकृत शासन के ज़रिए क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रोज़गार में योगदान देना।

स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्य

वे 9 विषय जिन पर हर पंचायत काम करती है

पंचायती राज मंत्रालय ने सतत विकास लक्ष्यों को 9 ऐसे विषयों में बाँटा है जिन पर गाँव काम कर सकता है। हम पंचायतों को एक विषय चुनने, उसकी योजना बनाने और प्रगति पर नज़र रखने में मदद करते हैं।

कैसे काम करता है

पहली मुलाकात से सम्मान तक

ग्राम संसद के साथ काम करने वाली हर पंचायत एक ही राह पर चलती है: गाँव को समझना, एक विषय पर योजना बनाना, दूसरों से सीखना, और नतीजों के लिए सम्मान पाना।

  1. 1

    जुड़ें

    मुखिया या सरपंच सदस्य बनते हैं और ध्यान देने के लिए एक LSDG विषय चुनते हैं।

  2. 2

    सर्वेक्षण

    हम गाँव की ज़मीनी हकीकत का अध्ययन करते हैं ताकि पता चले कि गाँव आज कहाँ खड़ा है।

  3. 3

    योजना और प्रशिक्षण

    प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को अपने विषय की योजना बनाने और उसे चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

  4. 4

    अनुभव यात्रा

    उन पंचायतों का भ्रमण, जो इस विषय पर पहले ही सफल काम कर चुकी हैं।

  5. 5

    सम्मान

    सभी 9 विषयों पर पंचायतों की रैंकिंग होती है, और अग्रणी पंचायतों को राज्य सम्मेलनों में सम्मानित किया जाता है।

ग्राम संसद बिहार चैप्टर-V मुखिया संवाद का पोस्टर, 21 सितंबर 2026, ताज सिटी सेंटर, पटना
हाल का कार्यक्रम

ग्राम संसद बिहार चैप्टर-V: मुखिया संवाद

ग्रामीण विकास और परिवर्तन पर मुखियाओं के साथ संवाद, रैंडम वेरिएबल फ़ाउंडेशन द्वारा पटना में आयोजित।

तारीख
21 सितंबर 2026, सुबह 9:00 बजे से
स्थान
ताज सिटी सेंटर, पटना, बिहार

“भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है।”

“यदि भारत को सशक्त बनाना है, तो पहले उसके गाँवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होगा।”

महात्मा गांधी · ग्राम स्वराज का आदर्श

2028 की कार्ययोजना

जागरूकता से आत्मनिर्भर पंचायत तक

पाँच साल की योजना: पहले नेटवर्क बनाना, फिर रोज़गार और बाज़ार, और फिर पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने में मदद करना।

  1. वर्ष 1–3

    नींव और जागरूकता

    • ज्ञान सम्मेलनहर साल ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए सम्मेलन
    • ज़िला और राज्य चैप्टरलोगों को जोड़ने और जागरूकता फैलाने के लिए
    • क्षमता निर्माण कार्यशालाएँगाँव के प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के लिए
    • सम्मानसमर्पित ग्राम प्रतिनिधियों की सराहना
  2. वर्ष 4

    गति

    • 50,000 रोज़गारनिजी क्षेत्र के साथ सहयोग के ज़रिए
    • बाज़ार से जुड़ावस्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए
    • पत्रिका और डिजिटल साधनजागरूकता फैलाने के लिए
  3. वर्ष 5 से आगे

    विस्तार

    • स्वयं के स्रोत से आय (OSR)पंचायतों के लिए आय सृजन
    • सतत विकासगाँवों का
    • CSR सहयोगकेंद्रित विकास के लिए CSR और अन्य हितधारकों के साथ
पंचायत वेबसाइट

आपकी पंचायत की अपनी वेबसाइट

हर सदस्य पंचायत को आपकागाँव.gramsansad.com पर अपनी मोबाइल-अनुकूल वेबसाइट मिल सकती है, हिंदी और अंग्रेज़ी में, जिसे सरपंच फ़ोन से ही अपडेट कर सकते हैं।

  • सरपंच संदेश और पंचायत टीम
  • कामों की पहले और बाद की फ़ोटो
  • बजट, योजनाएँ और ग्राम सभा की तारीखें
  • शिकायत, सूचना और आपातकालीन नंबर
राज्य चैप्टर

पूरे भारत में बढ़ता नेटवर्क

हर राज्य चैप्टर पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और सहयोगियों को सम्मेलन, प्रशिक्षण और सम्मान समारोहों के लिए साथ लाता है।

नेताओं की राय

राष्ट्रीय नेता क्या कहते हैं

  • विकसित भारत का संकल्प मूल रूप से हमारे गाँवों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर टिका है। शासन में बदलाव के लिए ज़रूरी है कि नीतियाँ दफ़्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह ज़मीनी नेतृत्व के ज़रिए अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें। स्थानीय प्रतिनिधियों का क्षमता निर्माण ही टिकाऊ ग्रामीण प्रगति और सच्चे ग्राम स्वराज की नींव है।
    Shri Nitin Nabinराष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  • समावेशी विकास तब शुरू होता है जब समुदाय अपना भविष्य गढ़ने में सक्रिय भागीदार बनते हैं। ग्राम संसद स्थानीय नेतृत्व को मज़बूत करने, सामूहिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत की आकांक्षाओं को सार्थक नतीजों में बदलने का मंच देती है।
    Shri Jagat Prakash Naddaस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार
  • ग्रामीण भारत की प्रगति ज्ञान को काम से जोड़ने पर निर्भर है। ग्राम संसद जैसी पहल नीति, संस्थाओं और समुदायों के बीच की दूरी कम कर सकती है, ताकि गाँव सोच-समझकर व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान अपना सकें।
    Shri Radha Krishna Kishoreवित्त, योजना एवं विकास मंत्री, झारखंड सरकार
  • ज़मीनी स्तर पर प्रभावी शासन के लिए सशक्त पंचायतें ज़रूरी हैं। ग्राम संसद स्थानीय प्रतिनिधियों को रोज़मर्रा के प्रशासन से आगे बढ़कर सहभागी योजना, मज़बूत जवाबदेही और समुदाय की ज़रूरतों के अनुसार विकास की ओर प्रेरित करती है।
    Shri Murari Gautamपूर्व पंचायती राज मंत्री, बिहार
  • ग्रामीण बदलाव के लिए दृष्टि, तालमेल और लगातार प्रतिबद्धता चाहिए। जन प्रतिनिधियों, संस्थाओं और विकास सहयोगियों को एक साथ लाकर ग्राम संसद स्थानीय प्राथमिकताओं को मिले-जुले प्रयास और स्थायी प्रगति में बदलने में मदद कर सकती है।
    Shri Tarkishore Prasadपूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार
  • भारत के गाँवों में हमारी परंपराओं, समुदायों और स्थानीय ज्ञान की ताकत है। टिकाऊ ग्रामीण विकास को इस विरासत को बचाते हुए नए अवसर बनाने होंगे। ग्राम संसद सामुदायिक नेतृत्व को गाँव के बदलाव की साझा सोच से जोड़ने का मंच देती है।
    Shri Gajendra Singh Shekhawatसंस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, भारत सरकार
  • जल सुरक्षा ग्रामीण समृद्धि की बुनियाद है। जब पंचायतें और समुदाय स्थानीय जल स्रोतों की योजना, संरक्षण और प्रबंधन में भाग लेते हैं, तो विकास ज़्यादा मज़बूत होता है। ग्राम संसद टिकाऊ ग्राम विकास के इस सामूहिक तरीके को मज़बूत करने में मदद कर सकती है।
    Shri Sanjay Kumar Jhaसांसद, राज्यसभा एवं कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, जद(यू)
  • विकास का असली पैमाना यह है कि लोगों की रोज़ की ज़िंदगी में कितना सुधार आया। ग्राम संसद समुदाय-आधारित तरीके को बढ़ावा देती है, जिसमें स्थानीय ज़रूरतें, बेहतर तालमेल और सामूहिक भागीदारी मज़बूत और विकसित गाँवों की राह दिखाती हैं।
    Shri Ashok Chaudharyमंत्री, बिहार सरकार
  • आत्मनिर्भर गाँवों को सिर्फ़ बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि उद्यम, रोज़गार और बाज़ार तक पहुँच के अवसर भी चाहिए। ग्राम संसद ग्रामीण समुदायों को संस्थाओं और विकास सहयोगियों से जोड़कर स्थानीय क्षमता को उभारने और टिकाऊ आजीविका बनाने में मदद कर सकती है।
    Shri Syed Shahnawaz Hussainपूर्व उद्योग मंत्री, बिहार
  • विकास तभी सार्थक है जब वह लोगों की आकांक्षाओं का जवाब दे। पंचायतों को मज़बूत कर और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर ग्राम संसद ग्रामीण प्रगति के ऐसे मॉडल का साथ देती है जो स्थानीय समझ पर आधारित, जवाबदेह और लंबे समय के असर पर केंद्रित है।
    Shri Samrat Choudharyमाननीय मुख्यमंत्री, बिहार
  • स्वस्थ समुदाय ही खुशहाल गाँवों की नींव हैं। जब स्थानीय नेतृत्व, सरकारी संस्थाएँ और नागरिक मिलकर जागरूकता, ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच और हर परिवार की भलाई के लिए काम करते हैं, तब ग्रामीण विकास ज़्यादा असरदार होता है।
    Shri Mangal Pandeyपूर्व स्वास्थ्य मंत्री, बिहार
  • स्थायी बदलाव तब शुरू होता है जब लोग अपने विकास की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं। ग्राम संसद समुदायों को अपनी प्राथमिकताएँ पहचानने, सामूहिक ताकत जुटाने और संस्थाओं के साथ मिलकर स्थानीय आकांक्षाओं को मापने योग्य प्रगति में बदलने के लिए प्रेरित करती है।
    Shri Sachchidanand Raiविधान परिषद सदस्य (MLC), बिहार
  • जब किसानों और गाँव के समुदायों को बाज़ार, तकनीक और कुशल आपूर्ति शृंखला तक बेहतर पहुँच मिलती है, तब ग्रामीण समृद्धि बढ़ती है। ग्राम संसद जैसे मंच ये जुड़ाव बनाकर मज़बूत आजीविका और समावेशी आर्थिक विकास की राह खोल सकते हैं।
    Shri Kishore Jhaसह-संस्थापक एवं निदेशक, Ergos
  • एक मज़बूत राष्ट्र सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर समुदायों पर बनता है। ग्राम संसद सामूहिक भागीदारी और ज़िम्मेदार स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देती है, ताकि ग्रामीण समुदाय भारत की विकास यात्रा में सक्रिय योगदान दे सकें।
    Shri Nityanand Raiगृह राज्य मंत्री, भारत सरकार
  • तकनीक का असली मूल्य तब है जब वह ज़मीनी समस्याएँ हल करे। ग्राम संसद नवाचार, ज्ञान और स्थानीय शासन को जोड़ने का अवसर देती है, ताकि गाँव व्यावहारिक समाधान अपनाकर ज़्यादा टिकाऊ भविष्य बना सकें।
    Shri Sumit Singhपूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, बिहार
  • सहभागी शासन समुदायों को अपने विकास में मज़बूत आवाज़ देता है। ग्राम संसद लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर संवाद, साझा ज़िम्मेदारी और ग्रामीण प्रगति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती है।
    Smt. Deepika Pandey Singhपंचायती राज, ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण कार्य मंत्री, झारखंड सरकार
  • टिकाऊ ग्रामीण विकास स्थानीय संसाधनों और समुदायों की क्षमता को उभारने में है। ग्राम संसद ज़मीनी नेतृत्व को उद्यम, नवाचार और साझा प्रयास से जोड़कर ऐसे अवसर बना सकती है जिनसे लोगों और पर्यावरण दोनों को लाभ हो।
    Shri Keshav InaniCEO, Vananam
  • ग्रामीण भारत का भविष्य लोगों को ज्ञान, अवसर और बदलाव का नेतृत्व करने का आत्मविश्वास देने में है। ग्राम संसद ऐसा मंच बनाती है जहाँ सामूहिक भागीदारी और लगातार प्रयास से स्थानीय आकांक्षाओं को दिशा मिलती है।
    Smt. Shreyasi Singhउद्योग एवं खेल मंत्री, बिहार
  • मज़बूत पंचायतें तब बनती हैं जब लोग एक साझा उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं। ग्राम संसद ज़मीनी नेतृत्व, सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देती है, ताकि स्थानीय प्राथमिकताएँ सार्थक विकास में बदलें।
    Shri Sanjay Singh Tigerउच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री, बिहार
  • ग्रामीण बदलाव के लिए साझा दृष्टि और ज़मीनी स्तर पर लगातार काम ज़रूरी है। ग्राम संसद समुदायों, जन प्रतिनिधियों और विकास सहयोगियों को साथ लाकर स्थानीय संस्थाओं को मज़बूत करती है और समावेशी व टिकाऊ विकास की राह बनाती है।
    Shri Deepak Prakashपंचायती राज मंत्री, बिहार
  • विकसित भारत का सपना खुशहाल गाँवों से शुरू होता है; ग्राम संसद नीति निर्माताओं और ग्रामीण नेतृत्व को जोड़ने वाला एक अहम पुल है।
    Shri Rajendra Vishwanath Arlekarमाननीय राज्यपाल, तमिलनाडु
  • सच्चा राष्ट्रीय विकास ज़मीनी स्तर से शुरू होता है, जहाँ सशक्त पंचायतें नीतियों को ठोस जन कल्याण में बदलती हैं। ग्राम प्रधानों के लगातार क्षमता निर्माण और नेतृत्व विकास के प्रयास सरकारी योजनाओं को पारदर्शिता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का अनिवार्य पुल हैं, और ग्राम स्वराज के महान आदर्श को मज़बूत करते हैं।
    Shri Haribhau Bagadeमाननीय राज्यपाल, राजस्थान
  • असली प्रगति सरकारी फ़ाइलों में नहीं होती; वह तब होती है जब गाँव के नेता और मेहनतकश नागरिक अपना भविष्य खुद तय करने का आत्मविश्वास पाते हैं। ज़मीनी ताकत इसी में है कि आम नागरिक ऐसे सक्षम निर्णयकर्ता बनें, जो सरकारी संसाधनों को सबसे नीचे के मेहनतकश परिवारों और किसानों तक सीधे पहुँचा सकें।
    Shri Raghubar Dasओडिशा के पूर्व राज्यपाल एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
  • सुशासन का असली पैमाना घोषित योजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि यह है कि सबसे दूर के गाँव के सबसे वंचित व्यक्ति को सामाजिक सम्मान, गरिमा और आर्थिक सुरक्षा मिली या नहीं। जब ग्राम परिषदें बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों पर ध्यान देती हैं, तब शासन प्रशासनिक औपचारिकता से ऊपर उठकर अपना पवित्र संवैधानिक कर्तव्य निभाता है।
    Shri Thaawar Chand Gehlotकर्नाटक के पूर्व राज्यपाल
गैलरी

हमारे सम्मेलनों की झलकियाँ

बिहार चैप्टर-V · मुखिया संवाद में दीप प्रज्वलन
राजस्थान सरपंच संवाद में सम्मान
झारखंड चैप्टर कॉन्क्लेव में सम्मान
बिहार चैप्टर-III में अपनी बात रखते पंचायत प्रतिनिधि
बिहार चैप्टर-II में मंच पर अतिथि

सशक्त और पारदर्शी पंचायतों के साथ जुड़ें

मुखिया, सरपंच, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा नेता और विकास कार्यकर्ता: सदस्य बनें और अपने गाँव को आगे बढ़ाएँ।