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ग्राम संसदGram Sansad
संरक्षकों का संदेश

Patron’s Message

गाँव सबसे पहले क्यों

ग्राम स्वराज, सामुदायिक स्वामित्व और भारतीय लोकतंत्र की जड़ के रूप में पंचायत पर हमारे संरक्षकों और संस्थापकों के विचार।

Padma Bhushan Dr. C. P. Thakur

Padma Bhushan Dr. C. P. Thakur

पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार

गाँव केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का केंद्र है।

सच्चा लोकतंत्र तब मुस्कुराता है जब गाँव की आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी लगे कि जहाँ फैसले होते हैं, वहाँ उसकी भी जगह है।

ग्राम संसद (Village Parliament Council) केवल चर्चा की जगह नहीं, बल्कि सामूहिक विचार-विमर्श का ऐसा मंच है जहाँ ध्यान सिर्फ़ संसाधनों के हिसाब-किताब पर नहीं, बल्कि भरोसे को नया करने पर होता है। इसीलिए ग्राम संसद हर फैसले को गाँव की ज़मीन, ज़रूरतों और जनभावना से जोड़ने की नींव बनती है।

जब पंचायत तकनीकी विशेषज्ञता को ग्रामीणों के पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ती है, तो विकास का पहिया सबको साथ लेकर चलता है। इस विकास यात्रा का सबसे अहम पहलू है सामुदायिक स्वामित्व। जब लोग अपनी योजनाओं, जल स्रोतों, संसाधनों और उत्पादन व्यवस्थाओं की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं, तो बाहरी सहारे पर निर्भरता घटती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था मज़बूत होती है। ग्रामीण समाज में यह स्वामित्व का भाव जितना गहरा होता है, गाँव उतनी ही अच्छी तरह अपनी पहचान, संस्कृति और संसाधनों को सहेजते हुए नए अवसर भी बनाता है।

कोई भी राष्ट्र सच्चे गर्व के साथ तभी खड़ा हो सकता है जब उसके गाँव आत्मनिर्भर बनें। हमारी यात्रा सत्ता के विकेंद्रीकरण से शुरू होती है और हर नागरिक के मानसिक और आर्थिक उत्थान की ओर आगे बढ़ती है।

— Padma Bhushan Dr. C. P. Thakur

Dr. Sanjay Mayukh

Dr. Sanjay Mayukh

अध्यक्ष, ग्राम संसद · मुख्य सचेतक, बिहार विधान परिषद · राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, BJP

गाँव की आत्मनिर्भरता एक मज़बूत राष्ट्र की ओर पहला कदम है।

हमारा उद्देश्य केवल गाँवों तक सुविधाएँ पहुँचाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे गाँव अपने संसाधनों, कौशल, परंपराओं और उभरती प्रतिभाओं के बल पर अपना भविष्य खुद बना सकें। जब ग्रामीण परिवारों को टिकाऊ आजीविका, अच्छे संसाधन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, तो आत्मनिर्भरता जीवन का तरीका बन जाती है।

इस सोच के केंद्र में यह विश्वास है कि जब किसान अपनी उत्पादकता बढ़ाता है, जब युवा नए विचारों के साथ उद्यमिता की ओर बढ़ते हैं, और जब महिलाएँ आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होती हैं, तब देश की अर्थव्यवस्था को असली गति, स्थिरता और सतत विकास मिलता है।

इस दिशा में ग्राम संसद की अहम भूमिका है। यह ऐसा मंच है जहाँ हर व्यक्ति, चाहे वह किसान हो, मज़दूर हो, दिव्यांग हो, महिला हो या युवा, को अपनी बात रखने का बराबर अधिकार है। ग्राम संसद वह मार्गदर्शक शक्ति है जो स्थानीय ज़रूरतों को पहचानती है, समस्याओं की जड़ तक पहुँचती है, और विकास योजनाओं को गाँव की प्राथमिकताओं के अनुसार नया रूप देती है।

— Dr. Sanjay Mayukh

Brajesha Sharma

Brajesha Sharma

संस्थापक एवं महासचिव, ग्राम संसद

brajesha.in ↗

“भारत का हृदय उसके गाँवों में बसता है। यदि भारत को सशक्त बनाना है, तो पहले उसके गाँवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होगा।” — महात्मा गांधी

ग्राम संसद की स्थापना गांधीजी के ग्राम स्वराज के आदर्शों से प्रेरित होकर हुई। हमारा मानना है कि सच्चा विकास तभी संभव है जब गाँव आत्मनिर्भर बने, अपने संसाधनों का सही उपयोग करे, मिलकर फैसले ले, और यह सुनिश्चित करे कि हर नागरिक सम्मान के साथ जी सके।

हमारा उद्देश्य है कि ग्राम पंचायत केवल एक प्रशासनिक इकाई बनकर न रहे, बल्कि एक जीवंत, जागरूक और सहभागी समाज का नमूना बने। हर घर तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाना, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बनाना, महिलाओं को सशक्त करना, और पर्यावरण के साथ तालमेल में आगे बढ़ना: यही हमारे प्रयासों की दिशा है।

— Brajesha Sharma

Mritunjay Singh

Mritunjay Singh

सह-संस्थापक एवं महासचिव, ग्राम संसद

हमारा मानना है कि ग्राम पंचायत और ग्राम संसद केवल शासन की इकाइयाँ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की असली जड़ें हैं।

जब ग्रामीण फैसलों में भाग लेते हैं, तो विकास केवल काग़ज़ी योजना नहीं, बल्कि सबकी साझा ज़िम्मेदारी बन जाता है।

ग्राम संसद एक जीवंत लोकतांत्रिक मंच है जहाँ हर आवाज़ मायने रखती है: महिलाएँ, युवा और बुज़ुर्ग, सभी की। यह सुनिश्चित करती है कि योजनाएँ असली ज़रूरतों को दर्शाएँ और पारदर्शिता के साथ लागू हों। फिर ग्राम पंचायत जवाबदेही और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए इन फैसलों को अमल में लाती है।

हमारा मिशन हर गाँव में सहभागी, पारदर्शी और समावेशी शासन स्थापित करना है, जहाँ ग्राम संसद और ग्राम पंचायत मिलकर आत्मनिर्भर भारत की नींव को मज़बूत करें।

— Mritunjay Singh

Sameer Chandrakar

Sameer Chandrakar

सह-संस्थापक एवं महासचिव, ग्राम संसद

गाँव केवल रहने की जगह नहीं हैं। वे लोकतंत्र की असली नींव हैं।

जब हर ग्रामीण को लगता है कि उसकी बात सुनी जाती है और उसे फैसलों में शामिल किया जाता है, तो लोकतंत्र और मज़बूत होता है। ग्राम संसद सामूहिक सोच और आपसी भरोसे का मंच है, जो ऐसी प्रगति सुनिश्चित करती है जिसका लाभ सबको मिले।

जब आधुनिक तकनीक गाँव के पारंपरिक ज्ञान के साथ जुड़ती है, तो विकास तेज़ और अधिक समावेशी होता है। मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और डिजिटल सेवाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में नए अवसर खोलती हैं। इससे ग्रामीण युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है और गाँव आत्मनिर्भर बनकर पूरे देश के लिए ताकत और गर्व की मिसाल बनते हैं।

— Sameer Chandrakar

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